कोरोना टीकाकरण के बावजूद 2021 में ‘हर्ड इम्यूनिटी’ बनने की संभावना कम: WHO ने दी चेतावनी
डब्ल्यूएचओ की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने अगाह किया कि भारत में कोविड-19 की वैक्सीनेस कार्यक्रम शुरू होने के बावजूद 2021 में कोरोनोवायरस के लिए 'हर्ड इम्युनिटी' बनने की संभावना बहुत कम है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ये बहुत जरूरी है कि देश और उनके नागरिक वैश्विक महामारी को नियंत्रित करने के लिए सोशल डिस्टेसिंग और कोरोना से बचाव के लिए अन्य नियमों का सख्ती से पालन करते रहें। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, और जर्मनी और यूरोपीय संघ के देशों सहित दुनिया भर के देशों ने हाल ही में टीकाकरण शुरू किया है। वहां सामूहिक टीकाकरण अभियान पहले चरण में हैं।
स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञों के अनुसार, 'हर्ड इम्युनिटी' के लिए हानिकारक कारकों में विकासशील देशों के टीकों तक सीमित पहुंच, टीकाकरण के बारे में संदेह और वायरस के म्यूटेशन की संभावना शामिल है। 'हर्ड इम्युनिटी' तब होती है जब एक आबादी में पर्याप्त लोगों में संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षा होती है ताकि यह बीमारी को फैलने से रोक सके। 'हर्ड इम्युनिटी' के लिए टीकाकरण की दर 70 प्रतिशत होनी चाहिए वैज्ञानिकों के अनुसार 'हर्ड इम्युनिटी' के लिए टीकाकरण की दर 70 प्रतिशत होनी चाहिए, जिससे पूरी आबादी संक्रमण से सुरक्षित हो सकती है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने ये भी आशंका व्यक्त की है कि कोरोना वायरस के अत्यधिक संक्रामक होने के कारण टीकाकरण की दर काफी अधिक होनी चाहिए।
टीकाकरण के बाद भी करने होंगे ये उपाय WHO महानिदेशक के सलाहाकार डाक्टर ब्रूस एल्वर्ड ने बताया कि संयुक्त स्वास्थ्य एंजेंसी को उम्मीद है कि विश्व के कुछ गरीब देशों में इस माह के अंत या फरवरी में कोरोना का टीकाकरण शुरू हो सकता है। साथ ही उन्होंने विश्व समुदाय से यह सुनिश्वित करने के लिए अधिक प्रयास करने को कहा कि सभी देशों में टीका पहुंचे। उन्होंने कहा कि "हम 2021 में जनसंख्या प्रतिरक्षा या 'हर्ड इम्युनिटी' के किसी भी स्तर को प्राप्त नहीं करने जा रहे हैं," स्वामीनाथन ने एक ब्रीफिंग में बताया, इस बात पर जोर देते हुए कि सोशल डिस्टेसिंग, हाथ धोना और मास्क पहनना जैसे उपाय इससे बचाव के लिए अभी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि टीके सभी देशों में लगाए जाएंगे लेकिन इसके बाद भी उन्होंने स्वच्छता और सामाजिक दूरी का पालन करने की सलाह दी है।

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